बादल को घिरते देखा है कविता के प्रकृति चित्रण को अपने शब्दों में लिखिए?
सवाल: बादल को घिरते देखा है कविता के प्रकृति चित्रण को अपने शब्दों में लिखिए?
जब मैंने बादल को घिरते देखा, तो मेरे मन में अनेक रंग और भाव उभर आए। सूरज की लालिमा में छिपे हुए बादल, उस नीले आसमान के साथ मिलकर अद्भुत नजारा बनाते थे। वे जैसे धरती को गले लगाने को तैयार थे, वैसे ही मन को भी संतुष्ट कर देते थे। उनके बेताब होने में अपनी अनगिनत स्वप्न छुपे रहते थे। बादलों के संगीत में धरती का मन भी भाग लेता था, और वे उसे अधूरे भाव से अब रंगीन बना देते थे। उनके बरसने से जीवन में नई उमंगें भर जाती थीं, और धरती के चेहरे पर खुशियां मुस्कराने लगती थीं। बादल को घिरते देखने से मन को शांति और समृद्धि की अनूठी अनुभूति होती थी, और वे उसे अपनी रहने की जगह में स्थापित कर देते थे।
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