सवाल: छायावादी कवियों में वेदना और पीड़ा की अधिकता के कारण किस प्रवृत्ति की प्रमुखता रही?
छायावादी कवियों में वेदना और पीड़ा की अधिकता के कारण रहस्यवाद की प्रवृत्ति प्रमुख रही।
रहस्यवाद का अर्थ है अज्ञात और अलौकिक शक्तियों के प्रति आकर्षण।
छायावादी कवि जीवन के दुखों और वेदनाओं से असंतुष्ट थे।
उन्हें जीवन का मकसद अज्ञात और अलौकिक शक्तियों में दिखाई दिया।
वेदना और पीड़ा ने उन्हें आत्मिक जगत् की ओर आकर्षित किया।
रहस्यवाद के कारण छायावादी कविता में निम्नलिखित विशेषताएं देखने को मिलती हैं:
- प्रकृति का मानवीकरण: छायावादी कवि प्रकृति को जीवित मानते थे और उसके साथ अपनी भावनाओं को व्यक्त करते थे।
- प्रतीकात्मकता: छायावादी कवि प्रतीकों का बहुत उपयोग करते थे।
- कल्पना: छायावादी कवि कल्पना के बल पर नई और अद्भुत दुनिया का निर्माण करते थे।
- संगीतात्मकता: छायावादी कविता में संगीत का बहुत प्रभाव था।
रहस्यवाद के प्रमुख छायावादी कवि:
- जयशंकर प्रसाद
- सुमित्रानंदन पंत
- निराला
- महादेवी वर्मा
उदाहरण:
- जयशंकर प्रसाद की कविता “झरना” में प्रकृति का मानवीकरण और प्रतीकात्मकता देखने को मिलती है।
- सुमित्रानंदन पंत की कविता “पल्लव” में कल्पना और संगीतात्मकता का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है।
- निराला की कविता “जूही की कली” में वेदना और पीड़ा का प्रभाव देखने को मिलता है।
- महादेवी वर्मा की कविता “नीहार” में रहस्यवाद का प्रभाव देखने को मिलता है।
निष्कर्ष:
रहस्यवाद छायावादी काव्य की प्रमुख प्रवृत्ति है।
यह प्रवृत्ति छायावादी कवियों की वेदना और पीड़ा को व्यक्त करने का एक माध्यम है।