सवाल: हिन्दी नवगीतों में विचलन का प्रयोग संयम और कौशल से किया जाना चाहिए।
हाँ, हिन्दी नवगीतों में विचलन का प्रयोग संयम और कौशल से किया जाना चाहिए। विचलन से तात्पर्य है, कविता में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना, चाहे वह छन्द, भाषा, विषय, या किसी अन्य रूप में हो। नवगीत में विचलन का प्रयोग इसलिए किया जाता है, ताकि कविता में नयापन और ताजगी आ सके। यह कविता को अधिक प्रभावशाली और रोचक बनाता है।
लेकिन विचलन का प्रयोग करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि यह कविता के मूल भाव को न बिगाड़ दे। विचलन का प्रयोग कविता के भाव को और अधिक स्पष्ट और प्रभावशाली बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
विचलन का प्रयोग करने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं:
- छन्द में विचलन: नवगीतों में छन्द का प्रयोग बहुत ही लचीला होता है। इसमें छन्द के नियमों को तोड़ा जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी गीते में मात्राओं की संख्या में परिवर्तन किया जा सकता है, या छन्द के तुक नियमों को तोड़ा जा सकता है।
- भाषा में विचलन: नवगीतों में भाषा का प्रयोग बहुत ही सहज और स्वाभाविक होता है। इसमें आम बोलचाल की भाषा का भी प्रयोग किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी गीते में क्षेत्रीय भाषा के शब्दों का प्रयोग किया जा सकता है, या किसी गीते को कविता के रूप में लिखा जा सकता है।
- विषय में विचलन: नवगीतों में विषयों की कोई सीमा नहीं होती है। किसी भी विषय पर नवगीत लिखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी गीते में किसी सामाजिक समस्या का वर्णन किया जा सकता है, या किसी गीते में प्रेम या प्रकृति का वर्णन किया जा सकता है।
नवगीतों में विचलन का प्रयोग करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- विचलन का प्रयोग सोच-समझकर करना चाहिए।
- विचलन का प्रयोग कविता के मूल भाव को बिगाड़ने के लिए नहीं करना चाहिए।
- विचलन का प्रयोग कविता को अधिक प्रभावशाली और रोचक बनाने के लिए करना चाहिए।
यदि इन बातों का ध्यान रखा जाए, तो विचलन का प्रयोग नवगीतों को अधिक सुंदर और प्रभावशाली बनाने में सहायक हो सकता है।