कबीर की वाणी किस ग्रंथ में संग्रहित है? Kabir ki vani kis granth mein sangrahit hai
सवाल: कबीर की वाणी किस ग्रंथ में संग्रहित है?
कबीर की वाणी प्रमुख रूप से "कबीर वाणी" या "कबीर के दोहे" के रूप में प्रस्तुत होती है, जिसे "कबीर ग्रंथावली" भी कहा जाता है। यह ग्रंथ संत कबीर द्वारा रचित छंदों, दोहों, गीतों और उक्तियों का संग्रह है। इसमें कबीर ने सामाजिक, आध्यात्मिक और नैतिक मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण को व्यक्त किया है।
कबीर के दोहे एक सरल और संक्षेप भाषा में लिखे गए हैं, जिनमें वे समाज, धर्म, ईश्वर, जीवन के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार प्रकट करते हैं। ये दोहे आम जनता तक पहुंचने के लिए गाए जाते थे और उनकी वाणी आज भी बहुत प्रसिद्ध है।
इसके अलावा, कबीर की वाणी और उपदेशों को अन्य संग्रहों में भी पाया जा सकता है, जैसे "साखी", "दोहावली", "ग्रंथावली", "बीजक", "सबदावली", "खड़गबरी" आदि। ये सभी ग्रंथ कबीर द्वारा लिखित नहीं हैं, लेकिन उनकी वाणी और उपदेशों को संकलित करते हैं।
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